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बनारस में चलती चिता के सामने घंटों तक क्यों बैठे रहते थे विकी कौशल

फिल्मी सितारें अपने रोल को बेहतर से बेहतर बनाने के लिए किसी भी हद तक गुजर जाते हैं। उन्हें कुछ ऐसा भी करना पड़ा है जो उन्होंने पहले कभी न किया हो और वो सामान्य जीवन की तुलना में इकाई बार कठिन भी होता है। हालांकि बाद में उन्हें अपनी मेहनत और संघर्ष का फल भी मिलता है और जब फिल्म बड़े पर्दे पर रिलीज होती है तो वे अपने बेहतरीन काम से दर्शकों का दिल जीत लेते हैं।

विकी कौशल स्टंट डायरेक्टर शाम कौशल के बेटे हैं। लेकिन बॉलीवुड से पुराना नाता होने कारण उन्हें कम संघर्ष नहीं करना पड़ा। उन्होनें छोटे मोटे रोल्स से अपने करियर की शुरूआत की। इसी बीच वे बहुचर्चित फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर में बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम किया।

इसी फिल्म फिल्म से उन्हें खास पहचान तो नहीं मिली लेकिन इसी फिल्म से जुड़े नीरज घैवान ने उनकी प्रतिभा को देखकर उन्हें फिल्म ‘मसान’ में मुख्य अभिनेता के तौर पर रोल ऑफर किया। जिसे विकी कौशल मना नहीं कर सके।

हालांकि विकी कौशल से पहले यह किरदार गैंग्स ऑफ वासेपुर से सुर्खियां बटोर चुके राजकुमार राव को ऑफर किया गया था। लेकिन किन्हीं कारणों से उन्होनें इस किरदार के लिए मना कर दिया। जिसके बाद यह रोल विकी कौशल को दिया गया।

विकी कौशल ने ‘मसान’ के लिए भरपूर मेहनत की, जो कि फिल्म में नजर भी आती है। इस फिल्म में उन्होनें बनारस के गंगा घाट पर मृत शरीरों का अतिंम संस्कार करने वाले डोमराजा का किरदार निभाया था।

अपने किरदार में पूरी तरह से उतरने के लिए विक्की घंटों तक जलती हुए चिता के सामने बैठे रहते थे। शूटिंग के दौरान विक्की का कई दिनों तक मुर्दों से सामना होता था। इस दौरान कई चिताएं उन्होंने अपनी आंखों से जलती हुई देखी और उनके देखरेख भी की।

आखिरकार विकी कौशल की मेहनत रंग लाई और उन्हें इस किरदार के लिए दर्शकों से तथा क्रिटिक्स से बेहद प्रशंसा मिली जिसके बाद से उनके लिए बॉलीवुड के रास्ते हमेशा के लिए खुल गए।

फिल्म बॉक्स ऑफिस पर रिलीज के वक्त के लोगों को प्रभावित तो नहीं कर सकी थी। लेकिन विकी कौशल की लोकप्रियता के बाद लोगों ने इस फिल्म को ज्यादा पसंद किया।

फिल्म में विक्की के अलावा पंकज त्रिपाठी, संजय मिश्रा, रिचा चड्ढा, श्वेता त्रिपाठी जैसे कलाकारों ने भी मुख्य भूमिका निभाई थी। ख़ास बात यह है कि फिल्म ने साल 2015 में कॉन्स फिल्म फेस्टिवल में दो अवॉर्ड भी जीते थे।



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